महानदी जल विवाद: 15 अक्टूबर को ट्रिब्यूनल की अहम सुनवाई
केंद्रीय जल आयोग की तकनीकी समिति के सामने आमने-सामने होंगे ओडिशा और छत्तीसगढ़
नई दिल्ली: महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (MWDT) 15 अक्टूबर को एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई करने जा रहा है, जिसमें केंद्रीय जल आयोग (CWC) की विस्तारित तकनीकी समिति की रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों ने ट्रिब्यूनल को सूचित किया है कि विस्तारित तकनीकी समिति 13 अक्टूबर को उन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेगी, जिन पर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से असहमति बनी हुई है।
इस बैठक में मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों पर गतिरोध सुलझाने का प्रयास किया जाएगा:
- गैर-मानसून प्रवाह का विवाद: क्या महानदी की जल-विज्ञान संबंधी स्थितियों को देखते हुए, नवंबर से मई के महीनों के दौरान पानी के बहाव को ओडिशा के दावे के मुताबिक ‘न्यूनतम गैर-मानसून प्रवाह’ माना जा सकता है?
- कल्मा बैराज से पानी का अधिकार: क्या छत्तीसगढ़ को हीराकुंड जलाशय के किनारे बने कल्मा बैराज से पानी निकालने का कानूनी अधिकार है?
यदि 13 अक्टूबर की बैठक में दोनों राज्यों के बीच कोई सहमति बनती है, तो उसे 15 अक्टूबर को न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) के समक्ष पेश किया जाएगा।
अमित शाह की बैठक के बाद बढ़ी उम्मीदें
15 अक्टूबर को होने वाली यह सुनवाई 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के ठीक बाद हो रही है। उस बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल शामिल हुए थे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कानूनी प्रक्रिया से हटकर आपसी सहमति से विवाद का समाधान खोजना था, जिसके बाद दोनों राज्य सैद्धांतिक रूप से केंद्रीय जल आयोग की मध्यस्थता वाले ढांचे को स्वीकार करने पर सहमत हो गए हैं।