धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बना गढ़फुलझर का रामचण्डी दिवस समारोह, कोलता समाज के योगदान की सराहना
रायपुर- छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के ऐतिहासिक स्थल गढ़फुलझर में ‘रामचण्डी दिवस समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, पूर्व केन्दीय मंत्री तथा सम्बलपुर सांसद श्री धर्मेंद्र प्रधान ,वरिष्ठ मंत्री श्री दयालदास बघेल और महासमुंद की सांसद व भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती रूपकुमारी चौधरी सहित कोलता समाज के अनेक गणमान्य जन शामिल हुए।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक
गढ़फुलझर स्थित माँ रणेश्वरी रामचण्डी की आराधना को समर्पित यह समारोह क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक पेश करता है। यह स्थान आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के साथ-साथ इस पावन भूमि पर सिख धर्म के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी के आगमन से जुड़ी गहरी मान्यताएँ भी हैं।
कोलता समाज का राष्ट्र निर्माण में योगदान
समारोह के दौरान समाज में कोलता समाज के अद्वितीय योगदान की सराहना की गई। अपनी कृषि परंपरा, अटूट धार्मिक आस्था और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए पहचाने जाने वाले कोलता समाज का अन्न उत्पादन और देश की खाद्य सुरक्षा में बेहद महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
विकसित भारत और किसान कल्याण का संकल्प
कार्यक्रम में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को ‘विकसित भारत’ बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए हर नागरिक का सशक्तीकरण अनिवार्य है। इसी विजन के साथ ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सरकारें कदम से कदम मिलाकर काम कर रही हैं। दोनों राज्यों की सरकारें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधारने, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने हेतु निरंतर प्रयासरत हैं।
समारोह के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी गई तथा महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी, माँ समलेश्वरी और माँ रणेश्वरी रामचण्डी से सभी नागरिकों के कल्याण व सुख-समृद्धि की कामना की गई।