आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नागपुर में विजयादशमी पर बड़ा संबोधन: ‘रिजीम चेंज’ की आंधी और एआई (AI) के झूठे प्रचार से सावधान रहने की चेतावनी
नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित वार्षिक विजयादशमी उत्सव को संबोधित किया. इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए, जहां संघ प्रमुख ने पारंपरिक शस्त्र पूजा भी की. अपने संबोधन में उन्होंने देश की सुरक्षा, सामाजिक एकता और आधुनिक तकनीकों के खतरों को लेकर कई बड़े संदेश दिए उन्होंने कहा कि भारत को ‘तोड़ने’ की कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सत्ता परिवर्तन या आंदोलनों से देश में वास्तविक बदलाव नहीं आता, बल्कि समस्याओं का समाधान समाज के भीतर से ही निकलता है। यह बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) में कथित अपारदर्शिता को लेकर देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है।
संघ प्रमुख ने आगाह किया कि जब विरोध प्रदर्शन राजनीतिक रूप से प्रेरित या प्रायोजित होते हैं, तो उनका इस्तेमाल समाज में तनाव, अराजकता और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए किया जाता है। यह सोचना पूरी तरह गलत है कि सिर्फ सत्ता बदलने से परिस्थितियां बदल जाएंगी। ऐसा न तो पहले कभी हुआ है और न ही आगे कभी ऐसा होगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में निर्णायक नीतियों के बल पर भारत ने जो प्रगति की है, उससे वैश्विक ताकतें परेशान हैं। वे भारत के बढ़ते कदमों को रोक नहीं पा रही हैं, इसलिए अब भारत और संघ को तोड़ने की साजिशें रची जा रही हैं।
संघ प्रमुख ने डिजिटल युग के खतरों पर बात करते हुए आगाह किया कि आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए बड़े पैमाने पर झूठा प्रचार फैलाया जा रहा है. इसके साथ ही उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशीली दवाओं की लत (ड्रग एडिक्शन) और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल पर भी गहरी चिंता जताई।
उन्होंने देश की नई पीढ़ी में बढ़ते राष्ट्रीय गौरव की सराहना की. भागवत ने समाज से अपील की कि भारत की हर तरह की विविधता का सम्मान किया जाना चाहिए उन्होंने कहा कि आंदोलनों का उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए, न कि समाज में कटुता या दुर्भावना पैदा करना ।
समाज में आपसी सद्भाव बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “हमारे इतिहास में हुए संघर्षों के कारण हमारे दिलों में कुछ घाव हैं, लेकिन हमें उन्हें भरने की जरूरत है। हमें नए विवाद और समस्याएं पैदा नहीं करनी चाहिए”
संघ प्रमुख भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत माता का स्थान सबसे ऊपर है. आरएसएस संपूर्ण समाज को एक सुसंगठित और बलशाली समाज बनाना चाहता है। उन्होंने कहा कि जब भारत का उदय होगा, तो यह दुनिया भर में संकीर्ण हितों के लिए काम करने वाली शक्तियों पर लगाम लगाएगा उन्होंने कहा की समाज से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी देश में बदलाव और सुधार का असली रास्ता समाज के भीतर के सुधारों से ही होकर गुजरता है।