रेलवे ट्रैक पर 24 जंगली हाथियों का कब्ज़ा; हावड़ा-मुंबई रूट ठप, 4 ट्रेनें फंसीं
राउरकेला: चक्रधरपुर रेलवे डिवीजन के अंतर्गत आने वाले हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलवे लाइन के बांदामुंडा सेक्शन में रविवार तड़के उस समय हड़कंप मच गया, जब 24 जंगली हाथियों का एक विशाल झुंड रेलवे ट्रैक पर आकर बैठ गया। हाथियों के इस अप्रत्याशित कब्ज़े के कारण ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बाधित हो गया है और पिछले कई घंटों से चार प्रमुख यात्री ट्रेनें अलग-अलग स्टेशनों पर खड़ी हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तड़के 2 बजे से ट्रैक पर डटा है झुंड
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार तड़के करीब 2:00 बजे से ही यह झुंड बांदामुंडा के ‘ए’ केबिन और ‘डी’ केबिन के बीच रेलवे ट्रैक पर डटा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि दिन का उजाला होने के बाद भी हाथियों ने ट्रैक नहीं छोड़ा और वे वहीं आसपास घूम रहे हैं। इसके चलते सुरक्षा के लिहाज से इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही को तुरंत रोक दिया गया।
ये ट्रेनें जहां-तहां रुकीं, यात्री परेशान
हाथियों के ट्रैक पर मौजूद होने के कारण कई ट्रेनें घंटों से फंसी हुई हैं। प्रभावित ट्रेनों का विवरण इस प्रकार है:
- 13352 धनबाद-एर्नाकुलम अलाप्पुझा एक्सप्रेस: रात करीब 1:45 बजे से ही राउरकेला स्टेशन पर खड़ी है।
- 18403 धनबाद स्पेशल ट्रेन: सुबह करीब 6:15 बजे से राउरकेला में रोकी गई है।
- 13425 सूरत-मालदा एक्सप्रेस: सुबह 6:00 बजे से बांगुरकेला स्टेशन पर खड़ी है।
- 20971 शालीमार सुपरफास्ट एक्सप्रेस: सुबह 7:00 बजे से कलुंगा स्टेशन पर रुकी हुई है।
घंटों से ट्रेनों में बंद यात्रियों को खाने-पीने और अपनी मंजिल तक समय पर पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, रेलवे के लिए बड़ी चुनौती
घटना की सूचना मिलते ही राउरकेला वन विभाग की एक विशेष टीम मौके पर पहुंच चुकी है। वन कर्मी हाथियों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए, सुरक्षित रूप से ट्रैक से खदेड़ने (रेस्क्यू) के प्रयास में जुटे हैं। रेलवे प्रशासन भी लगातार हाथियों की हर हरकत पर पैनी नजर बनाए हुए है। हालांकि, हाथियों के ट्रैक से न हटने के कारण परिचालन को फिर से बहाल करना रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
वन्यजीवों और यात्रियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले पांच महीनों में इस क्षेत्र में हाथियों के झुंड के बार-बार आने की घटनाएं बढ़ी हैं। रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की इस तरह की मौजूदगी ने न केवल ट्रेनों के संचालन को प्रभावित किया है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और बेजुबान वन्यजीवों की जान पर भी बड़ा जोखिम खड़ा कर दिया है। फिलहाल वन विभाग और रेलवे की कोशिशें जारी हैं और सभी को इंतजार है कि कब ट्रैक खाली होगा और ट्रेन सेवाएं सामान्य हो सकेंगी।