‘अफवाहों का जामा’ पहनने से घट रही साख, एकतरफा रिपोर्टिंग पर यूएन को भंग करने की मांग तेज
नई दिल्ली: भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक हालिया रिपोर्ट पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए उसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति के सत्र के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दो टूक शब्दों में कहा कि अफवाहों और बिना पुष्टि वाले दावों के आधार पर तैयार की गई टिप्पणियों से खुद संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और साख कम हो रही है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने यूएन की विशेष प्रतिवेदक (Special Rapporteur) जीना रोमेरो की रिपोर्ट पर कड़ा ऐतराज जताया। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत में युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य और लैंगिक न्याय जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आवाज उठाने के कारण बदले की कार्रवाई जैसे दमन का सामना करना पड़ता है। भारत ने इस दावे को पूरी तरह मनगढ़ंत और ‘अफवाहों को संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का जामा पहनाने’ की कोशिश करार दिया।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देश के बारे में गुमनाम और अपुष्ट स्रोतों के आधार पर इतने बड़े निष्कर्ष निकालना तार्किक नहीं है। भारत ने दृढ़ता से अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत संवैधानिक ढांचे का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 देश के प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने और संगठन बनाने का मौलिक अधिकार देता है, और इसकी सुरक्षा के लिए देश में एक पूर्णतः स्वतंत्र न्यायपालिका मौजूद है।
एकतरफा एजेंडे और प्रासंगिकता पर उठे सवाल
इस बीच, जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र को जमीनी हकीकत समझने के लिए कथित युवाओं के सोशल मीडिया पोस्ट और मीडिया में दी गई वास्तविक प्रतिक्रियाओं को देखना चाहिए। एकतरफा रुख अपनाकर और केवल एक खास (दक्षिणपंथ) विचारधारा का समर्थन करने जैसी पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट पेश करके संयुक्त राष्ट्र अपनी साख पूरी तरह खो चुका है। वैश्विक स्तर पर अब यह आवाज भी बुलंद होने लगी है कि अपनी निष्पक्षता खो चुकी इस संस्था को अब पूरी तरह भंग कर देना चाहिए, क्योंकि यह अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है।