एनआईटी राउरकेला में 17वें ओडिशा पर्यावरण का आगाज़: पर्यावरण संरक्षण के लिए तकनीकी नवाचार पर ज़ोर
राउरकेला — नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) राउरकेला में तीन दिवसीय 17वें ओडिशा पर्यावरण कांग्रेस (OEC) का शानदार शुभारंभ हुआ। इस वर्ष यह सम्मेलन “पर्यावरण और प्रौद्योगिकी” (Environment and Technology) थीम पर आयोजित किया जा रहा है। 3 से 5 नवंबर तक चलने वाले इस महाकुंभ में देशभर के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, नीति निर्माता, पर्यावरणविद्, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और छात्र एकजुट हुए हैं।
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह तलाशना है कि कैसे वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी प्रगति और नवाचार (Innovation) के ज़रिए पर्यावरण की रक्षा और सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा दिया जा सकता है।
प्रमुख बिंदु और मुख्य चर्चाएं
- आरएंडडी (R&D) में निवेश की अपील: ओडिशा के पूर्व मुख्य सचिव गोकुल चंद्र पति ने अनुसंधान और विकास (Research & Development) में निवेश बढ़ाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का सबसे बुरा असर समाज के कमज़ोर वर्गों पर पड़ रहा है, इसलिए सरकारी एजेंसियों, उद्योगों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर तालमेल होना ज़रूरी है।
- हरित ऊर्जा और प्रदूषण नियंत्रण: थर्मल पावर प्लांटों से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए ‘इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रेसिपिटेटर’ जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। साथ ही, कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम करने के लिए सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों को अपनाने की वकालत की गई।
- वैज्ञानिक खेती: कृषि में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग और सिंचाई के पानी की बर्बादी पर चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने किसानों की ट्रेनिंग और वैज्ञानिक हस्तक्षेप को समय की मांग बताया।
सामूहिक ज़िम्मेदारी और जनभागीदारी
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एनआईटी राउरकेला के निदेशक प्रोफेसर के. उमामहेश्वर राव ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण को बचाना केवल सरकारों का काम नहीं है।
“पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों और अनुसंधान संस्थानों की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए व्यक्तिगत जवाबदेही और सक्रिय जनभागीदारी की बेहद ज़रूरत है।”
— प्रो. के. उमामहेश्वर राव, निदेशक, एनआईटी राउरकेला
कांग्रेस के संयोजक और आयोजन सह-अध्यक्ष प्रोफेसर हिमांशु भूषण साहू (अध्यक्ष, सतत विकास लक्ष्य समिति, NIT) ने कहा कि यह आयोजन स्थापित वैज्ञानिकों और युवा शोधकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान करता है। इस सम्मेलन में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और आईआईटी खड़गपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए हैं।
बड़ी पहल और अभूतपूर्व शोध
- पर्यावरण इनोवेशन सेल: पूर्व मुख्य सचिव गोकुल चंद्र पति ने व्यावहारिक पर्यावरण समाधान तैयार करने के लिए एनआईटी राउरकेला में एक स्थायी ‘पर्यावरण इनोवेशन सेल’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
- नवाचारों को वित्तीय मदद और मेंटरशिप: एनआईटी राउरकेला ने घोषणा की है कि पर्यावरण से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान खोजने वाले होनहार शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों और स्कूली छात्रों के प्रोजेक्ट्स को संस्थान की ओर से आर्थिक सहायता और मेंटरशिप (मार्गदर्शन) दी जाएगी।
- प्लास्टिक खाने वाले बैक्टीरिया पर रिसर्च: प्रो. साहू ने खुलासा किया कि एनआईटी राउरकेला और ओडिशा के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के वैज्ञानिक ऐसे विशेष बैक्टीरिया विकसित करने पर शोध कर रहे हैं जो प्लास्टिक कचरे को तेज़ी से नष्ट कर सकें। इसके साथ ही सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विकल्प के रूप में तेज़ी से गलने वाली सामग्रियों (Alternative Materials) पर भी काम चल रहा है।
- जलवायु परिवर्तन की चेतावनी: ओडिशा में बार-बार आने वाली बाढ़, चक्रवात, बेमौसम भारी बारिश और सूखे का ज़िक्र करते हुए प्रो. साहू ने आगाह किया कि यदि उपलब्ध तकनीकों को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया, तो इसके परिणाम आने वाले समय में और अधिक गंभीर हो सकते हैं।
आगे का कार्यक्रम
इस तीन दिवसीय सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण बुधवार को आयोजित होने वाली ‘चिल्ड्रेन्स कांग्रेस’ होगी। इसमें स्कूली बच्चे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अपने अनूठे आइडिया और तकनीकी मॉडल पेश करेंगे। जिन बच्चों के प्रस्ताव (Proposals) सबसे बेहतरीन होंगे, उन्हें एनआईटी राउरकेला के प्रोफेसरों की देखरेख में आगे विकसित किया जाएगा और फंड भी दिया जाएगा।
यह तीन दिवसीय सम्मलेन शोधकर्ताओं, उद्योगों और आम जनता के बीच एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने के संकल्प के साथ 5 नवंबर को संपन्न होगा।