सरकारी अधिकारियों की गैर-हाजिरी पर भड़का एन जी टी, ओडिशा के मुख्य सचिव सहित 8 अफसरों पर लगाया 2 लाख का जुर्माना
भुवनेश्वर: अवैध बालू खनन के एक गंभीर मामले में सरकारी अधिकारियों के ढुलमुल रवैये पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ ने अदालती कार्यवाही में बार-बार अनुपस्थित रहने और जवाब दाखिल न करने पर ओडिशा के मुख्य सचिव सहित आठ वरिष्ठ अधिकारियों पर कुल ₹2 लाख का जुर्माना ठोक दिया है। अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अंगुल के जिला कलेक्टर को छोड़कर (जिनकी ओर से तहसीलदार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे) मामले से जुड़े प्रत्येक अधिकारी को ₹25,000 की जुर्माना राशि भरनी होगी। इन सभी अधिकारियों को एक महीने के भीतर कोलकाता स्थित ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार के पास यह राशि जमा करने का सख्त निर्देश दिया गया है।
ब्राह्मणी नदी में अवैध खनन का है मामला
न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी, विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल और ईश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश अंगुल जिले की तलचर तहसील के अंतर्गत ब्राह्मणी नदी में स्थित ‘निज्ग़र्ज़मी बालू खदान’ (गोपीनाथपुर बालू खदान) से जुड़े एक मामले में दिया। याचिका में इस खदान में तय सीमा से अधिक और पूरी तरह अवैध रूप से बालू का धड़ल्ले से खनन करने के आरोप लगाए गए हैं।
न्यायिक प्रक्रिया में देरी बर्दाश्त नहीं’
अधिकारियों की लगातार अनुपस्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए एनजीटी की पीठ ने तीखी टिप्पणी की। ट्रिब्यूनल ने कहा, “सरकारी अधिकारियों का लगातार अदालत में पेश न होना और समय पर जवाब दाखिल न करना न्यायिक प्रक्रिया में बेवजह देरी का कारण बन रहा है, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 4 दिसंबर तय की है, जिसमें सभी संबंधित पक्षों को पूरी तैयारी और जवाब के साथ उपस्थित रहने को कहा गया है। पर्यावरणविदों ने एनजीटी के इस कड़े कदम का स्वागत किया है और इसे सरकारी तंत्र की जवाबदेही तय करने के लिए एक अच्छा कदम बताया है।