बैलेट में मतदान होने के बाद भी कांग्रेस का सूपड़ा साफ: 0 सीट जीतकर रचा इतिहास
नई दिल्ली: हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों के नतीजों ने देश की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। मतपत्रों (Ballot Papers) से हुए इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहा है, जहाँ देश की सबसे पुरानी पार्टी सभी चार राज्यों में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही और शून्य पर सिमट गई। इन नतीजों के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और विपक्षी खेमे द्वारा लगातार चुनाव आयोग (ECI) और ईवीएम (EVM) पर लगाए जाने वाले ‘वोट चोरी’ के आरोप पूरी तरह विफल साबित होते दिख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष हमेशा ईवीएम में गड़बड़ी का दावा करता रहा है, लेकिन बैलेट पेपर से हुए इस सीधे मुकाबले में भी कांग्रेस का अपनी चारों पारंपरिक सीटें गंवा देना यह साबित करता है कि जमीन पर जनता का भरोसा पार्टी से उठ चुका है। ऐसे में चुनाव आयोग पर उठाए गए सवाल अब खुद विपक्षी गठबंधन के भीतर ही आत्ममंथन का विषय बन गए हैं।
विधान परिषद चुनाव: प्रमुख दलों का तुलनात्मक विश्लेषण
| राजनीतिक दल | पिछली सीटें (Last Result) | वर्तमान चुनावी नतीजा (Present Result) | राजनीतिक प्रभाव व स्थिति |
|---|---|---|---|
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 12 सीटें | 15 सीटें (NDA कुल 16) | तीन सीटों के फायदे के साथ देश भर में सबसे मजबूत प्रदर्शन। |
| समाजवादी पार्टी (SP) | 3 सीटें | 5 सीटें | उत्तर प्रदेश में दो सीटों का सीधा फायदा, वाराणसी जैसी अहम सीटें जीतीं। |
| कांग्रेस (Congress) | 4 सीटें | 0 (शून्य) | बैलेट पेपर से वोटिंग के बावजूद पूरी तरह सूपड़ा साफ, चारों जीती सीटें भी गंवाईं। |
| राकांपा – शरद पवार (NCP-SP) | 2 सीटें | 3 सीटें | 1 सीट के इजाफे के साथ महाराष्ट्र (MVA) में अपनी पकड़ मजबूत की। |
राज्यों का सीटवार समीकरण और बड़े उलटफेर
- कर्नाटक (कुल 4 सीटें): राज्य की सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की अपनी पारंपरिक सीट भी जेडीएस (JDS) के हाथों हार गई। भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने यहाँ क्लीन स्वीप कर दिया।
- उत्तर प्रदेश (कुल 11 सीटें): समाजवादी पार्टी ने मतपत्रों के जरिए शानदार जमीन तैयार की और भाजपा के गढ़ में सेंध लगाकर अपनी सीटें 3 से बढ़ाकर 5 कर लीं, जबकि यहाँ भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला।
- बिहार (कुल 8 सीटें): बिहार में सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा अपनी दरभंगा शिक्षक सीट प्रशांत किशोर की नई पार्टी ‘जन सुराज’ से हार गए। वहीं आरजेडी (RJD) ने पटना शिक्षक सीट पर भाजपा को हराकर 1 सीट का फायदा कमाया।
- महाराष्ट्र (कुल 5 सीटें): भाजपा नीत महायुति ने अपनी बढ़त को 3 सीटों तक पहुंचाया, वहीं शरद पवार की एनसीपी (NCP-SP) ने भी 1 सीट का इजाफा किया।
विपक्ष के हौसलों पर मनोवैज्ञानिक चोट
चुनावी नतीजों के बाद राजनीतिक दलों के बीच सियासी खींचतान तेज हो गई है। जहां भाजपा और उसके सहयोगी दल इसे जनता का असली विश्वास बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस के शून्य पर सिमटने से ‘इंडी’ (INDI) गठबंधन के आंतरिक समीकरण बिगड़ने तय माने जा रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, बैलेट पेपर के चुनाव में भी मात खाना कांग्रेस के लिए एक बड़ा वैचारिक और मनोवैज्ञानिक झटका है।