पीयूष गोयल का बयान चीन में वायरल; चीनी सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप, भारतीयों के दृढ़ संकल्प से डरे चीनी नागरिक
नई दिल्ली: भारत के केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने चीन के कड़े व्यापार प्रतिबंधों के बीच एक कड़ा संदेश दिया है कि भारत न तो झुकेगा और न ही अपने रणनीतिक हितों से समझौता करेगा।
केंद्रीय मंत्री का यह बयान चीन की ओर से टनल-बोरिंग मशीनों (TBMs) पर लगाए गए नए निर्यात-लाइसेंस नियमों के जवाब में आया है। पीयूष गोयल का यह आक्रामक और साहसी रुख अब चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है।
चीन में भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद और बदलता माहौल
अक्सर देखा गया है कि दुनिया के कई देशों की तरह चीन में भी भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद (Racism) फैलाया जाता है और भारतीय तकनीकी क्षमता को कमतर आंका जाता है। लेकिन पीयूष गोयल के इस कड़े रुख के बाद चीन के सोशल मीडिया और वहां के नागरिकों का नजरिया बदलता दिख रहा है। अब चीन में यह चर्चा शुरू हो गई है कि भारत उन्हें गलत समझ रहा है। हालांकि, चीन के लोग अब अंदरूनी तौर पर काफी परेशान और चिंतित नजर आ रहे हैं।
चीनी जनता में घबराहट की वजह
चीनी नागरिकों की इस चिंता के पीछे भारत की वह क्षमता है जिससे अब पूरी दुनिया वाकिफ हो चुकी है:
- भारतीयों का दृढ़ संकल्प: चीन के लोग जानते हैं कि भारतीय अगर कोई काम करने की ठान लेते हैं, तो उसे हर हाल में पूरा करते हैं।
- बेहतर गुणवत्ता (Quality): यदि भारत ने खुद टनल-बोरिंग मशीनें बनाना शुरू कर दिया, तो उनकी मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी चीन से कहीं अधिक बेहतर होगी।
- किफायती कीमत (Cost-Effective): भारतीय इंजीनियरिंग न केवल मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक बाजार में बेहद किफायती और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध होगी, जो चीन के एकाधिकार को खत्म कर देगी।
चीन का अपना इतिहास: 2002 तक शून्य था उत्पादन
दिलचस्प बात यह है कि टनल-बोरिंग मशीनों के बाजार पर आज दादागिरी दिखाने वाला चीन खुद सन 2002 तक एक भी ऐसी मशीन नहीं बनाता था।
- 2002 का फैसला: साल 2002 के बाद चीन की सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक निर्णय लिया और घरेलू स्तर पर TBM उत्पादन को भारी सरकारी मदद दी।
- आज का एकाधिकार: इसी आक्रामक नीति के दम पर आज वैश्विक टनल-बोरिंग मशीन बाजार के लगभग 70% हिस्से पर चीन का नियंत्रण है।
आत्मनिर्भर भारत का शंखनाद
पीयूष गोयल ने दिल्ली में आयोजित एक मंच पर चीन को याद दिलाया कि भारत किसी के आगे घुटने नहीं टेकेगा। उन्होंने साफ कहा:
“भारत वह देश नहीं है जो झुक जाए। कई अन्य देश घुटने टेक सकते हैं और सौदे के लिए भीख मांग सकते हैं, लेकिन हमारी सोच अलग है। अगर चीन टनल-बोरिंग मशीनें देने से इनकार करता है, तो हम इन्हें खुद भारत में ही विकसित करेंगे।”
चीन ने पहले भी उद्योगों को पंगु बनाने के लिए ‘रेयर-अर्थ एलिमेंट्स’ (दुर्लभ खनिजों) की आपूर्ति रोकी थी, तब भारतीय स्टार्टअप्स ने बिना रेयर-अर्थ मिनरल्स के चलने वाली एडवांस मोटरें बनाकर चीन को जवाब दिया था। अब TBM के मामले में भी भारत हेवी इंजीनियरिंग कंपनियां (जैसे BEML और Larsen & Toubro) स्वदेशी प्रोटोटाइप पर काम तेज कर चुकी हैं, जो चीन के इस नए व्यापारिक युद्ध को पूरी तरह नाकाम कर देगा।