भारतीय समुदाय शांतिप्रिय, नहीं करता यूरोप जैसी तोड़फोड़; पक्षपाती वैश्विक नैरेटिव पर भी उठे सवाल
बर्लिन में बोले पीयूष गोयल: भारतीय समुदाय शांतिप्रिय, नहीं करता यूरोप जैसी तोड़फोड़; पक्षपाती वैश्विक नैरेटिव पर भी उठे सवाल
बर्लिन: जर्मनी के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन में भारतीय प्रवासियों (Indian Diaspora) को संबोधित करते हुए उनके शांतिपूर्ण आचरण की जमकर सराहना की। इस दौरान उन्होंने यूरोप के मौजूदा हालातों का हवाला देते हुए वैश्विक स्तर पर भारतीयों के बढ़ते सम्मान को रेखांकित किया।
यूरोप के तनाव के बीच भारतीयों के संयम की तारीफ
केंद्रीय मंत्री ने यूरोप के कुछ देशों में चल रहे हालिया घटनाक्रमों की तुलना भारतीय समुदाय के व्यवहार से की। फ्रांस, इटली और बेल्जियम जैसे यूरोपीय देशों में प्रवासियों द्वारा किए जा रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों और तनाव का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए पीयूष गोयल ने कहा, “दुनिया के तमाम देश जानते हैं कि भारतीय समुदाय स्वभाव से ही शांतिप्रिय है। विदेशी सरकारें भली-भांति जानती हैं कि भारतीय लोग तोड़फोड़ (Vandalism) में शामिल नहीं होते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “भारतीय सड़कों पर उतरकर समाज में कोई गड़बड़ी या अशांति पैदा नहीं करते हैं, जैसा कि हम वर्तमान में यूरोप के कुछ अन्य हिस्सों में देख रहे हैं। भारतीय विदेशों में अपने परिवारों के साथ शांति से रहते हैं और स्थानीय नियमों का पूरा सम्मान करते हैं।” गोयल ने जोर देकर कहा कि आज वैश्विक स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा यह है कि किसी देश में आपका कितना सम्मान है, और अच्छी बात यह है कि भारतीयों को हर देश में बहुत पसंद और स्वीकार किया जाता है।
वैश्विक मीडिया और बुद्धिजीवियों के दोहरे मापदंड पर चर्चा
इस कार्यक्रम और मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच, वैश्विक मीडिया और अंतरराष्ट्रीय बुद्धिजीवियों (Intellectuals) के दोहरे मापदंडों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। विश्लेषकों और सोशल मीडिया पर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूरोप में जारी इस बड़े पैमाने की हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ का आधा हिस्सा भी भारत में हुआ होता, तो अब तक अमेरिकी और यूरोपीय समाचार पत्र आलोचनात्मक लेखों से भर चुके होते।
तथाकथित अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंक और बुद्धिजीवी सोशल मीडिया पर भारत विरोधी नैरेटिव (Narrative) खड़ा कर देते। इसके विपरीत, यूरोप में हो रही इस गंभीर हिंसा पर वैश्विक स्तर पर एक अजीब सी चुप्पी देखी जा रही है। सबसे खास बात यह है कि यूरोप की इन हिंसक घटनाओं में एक भी भारतीय शामिल नहीं है, इसके बावजूद विदेशों में रह रहे निर्दोष भारतीयों को अक्सर नस्लवाद (Racism) का सामना करना पड़ता है।
भारत-जर्मनी के बीच ‘मजबूत सेतु’ बनने का आह्वान
केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर भारतीय प्रवासियों से अपील की कि वे भारत और जर्मनी के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक ‘मजबूत सेतु’ (Strong Bridge) के रूप में कार्य करें। उन्होंने प्रवासियों से भारत के आर्थिक विकास में भागीदारी निभाने और देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने का आह्वान किया।